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*भगवान बनने के लिये पहले भक्त बनना होगा,तब ही मुक्ति का द्वार खुलेगा–मुनि श्री विशोधसागर जी*

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*भगवान बनने के लिये पहले भक्त बनना होगा,तब ही मुक्ति का द्वार खुलेगा–मुनि श्री विशोधसागर जी*
खंडवा। प्रत्येक आत्मा में भगवान बनने की शक्ति विद्यमान है, बस उस शक्ति को पहचानकर अभिव्यक्त करने की कला आना चाहिये, जो जीव इस दुर्लभ कला को जानकर उसे जीवन जीने के लिये प्रयोग में लाता है,वही एक दिन भगवान बन जाता है।जिनेन्द्र भगवान की सच्ची भक्ति ही भगवान बनने के मार्ग का प्रवेश द्वार है।इसीलिये कहा जाता है कि भगवान बनने के पहले भक्त बनना चाहिये।
उक्त उदगार मुनि श्री विशोधसागर जी ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कही। मुनि श्री ने कहा कि वैराग्यवर्धिनी बारह भावनाओं के चिंतन को अनिवार्य बताते हुए उन्होंने कहा कि मोहनीय कर्म की तीव्रता को कम करने के लिये ये भावनायें अत्यंत प्रभावी हैं।जीवन के प्रत्येक पल और प्रत्येक घटना को इन भावनाओं के साथ घटाकर देखना चाहिये, तब ही हम सच्चे अर्थों में वैराग्य दशा की ओर बढ़ सकते हैं।मोह,राग,द्वेष आदि विकारी भावों की उत्पत्ति को रोकने के लिये हमें सभी जीवों को भगवान मानकर व्यवहार करना चाहिये।
सामाजिक एकता की आवश्यकता पर बल देते हुए मुनि श्री ने कहा कि आज हम संख्या में कम होने के बाद भी मंदिरों और मठो में बंट गये है।हमे पंथ को लेकर नहीं महावीर के पथ पर चलना है। तभी हम धर्म और संस्कृति की रक्षा कर सकेंगे।
समाज के सचिव सुनील जैन एवं प्रेमांशु चौधरी ने बताया कि खण्डवा समाज को लगभग 20 दिन तक मुनि श्री का समागम मिलेगा। सोमवार को प्रवचनमाला का शुभारम्भ जितेंद्र लुहाडिया एवम दिलीप पहाड़िया ने दीप प्रज्वलन कर किया। संचालन अविनाश जैन ने किया। मंगलाचरण प्रीति लोहाडिया ने किया।आहारदान का अवसर अर्चना प्रदीप रावका परिवार को मिला। समाज सचिव सुनील जैन ने बताया कि हर्ष का विषय हें की इन दिनों खंडवा नगर में मुनि श्री विशोध सागर जी महाराज का सानिध्य समाज जनों को प्राप्त हुआ है। प्रतिदिन बजरंग चौक स्थित महावीर दिगंबर जैन मंदिर में प्रातः 8:30 बजे से प्रवचन 10:00 आहारर्चया, दोपहर में तत्व चर्चा, साय:काल स्वर्गीय धनपालजी कासलीवाल के निवास पर गुरु भक्ति का आयोजन आयोजित हो रहा है। मुनि सेवा समिति के अध्यक्ष विजय सेठी, समाज अध्यक्ष वीरेंद्र जैन, दिलीप पहाड़िया, पंकज छाबड़ा ने सभी समाज जनों से मुनि श्री के कार्यक्रमों में उपस्थित होकर पुण्य प्राप्त करने का अनुरोध किया है। प्रवचन माला में महेश रेखा जैन,विमला दौलतराम जी,प्रकाशचन्द जैन,अशोक लुहाड़िया,प्रकाश गदिया, सुनील जैन, राजकुमारी चौधरी,चिंता वोरा,शांति बैनाड़ा,शिल्पी गंगवाल,राशि बड़जात्या आदि उपस्थित थे।

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